हमारे जीवन पर बॉडी लैंग्वेज का प्रभाव | Effect of body language on our life

hamare jiwan par body language ka prabhaw

हमारे जीवन पर बॉडी लैंग्वेज का प्रभाव

दोस्तों, आजकल का मौजूदा कॉर्पोरेट भारत केवल डिग्री से लैस कर्मचारियों की तलाश में नहीं होती, बल्कि यह जमाना स्मार्ट कर्मचारियों का है। स्मार्टनेस से मतलब ऐसे एंप्लॉई से है , जिसमें प्रोफेसनल क्वॉलिफिकेशन तो हो ही , साथ ही वह सॉफ्ट स्किल्स से भी भरपूर हो । अगर आप भी ऑफिस में अपनी बॉडी लैंग्वेज पर खास ध्यान देते हैं, तो आपका यह हुनर आपको बाकी लोगों से अलग बना देगा।

hamare jiwan par body language ka prabhaw

यदि आप किसी से फोन पर बात करते हैं और एक ही व्यक्ति से आमने-सामने बात करते हैं, तो दोनों स्थितियों के नतीजों में जमीन आसमान का अंतर हो सकता है । इसके पीछे दोनों व्यक्तियों की बॉडी लैंग्वेज है। दरअसल, बॉडी लैंग्वेज का हमारे जीवन के हर पल पर प्रभाव पड़ता है। भले ही हम इसे महसूस करें या नहीं ? पर करियर में भी आगे बढ़ने के लिए, जितना अच्छा प्रदर्शन जरूरी है, उतना ही जरूरी है अपनी बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान देना।

साथ ही, यदि आपके पास अन्य लोगों की बॉडी लैंग्वेज पढ़ने का कौशल है। तो यह बात आपके लिए सोने पर सुहागा साबित होगी । यदि आप सेल्स के क्षेत्र में हैं, तो शरीर की भाषा समझने की कला आपके करियर को आगे बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हो सकती है। आपको अपने संभावित ग्राहक की बॉडी लैंग्वेज देखकर पता चल जाएगा कि उस व्यक्ति को आपके उत्पाद में दिलचस्पी है या नहीं?

हमारा मस्तिष्क लगभग हर शरीर मुद्रा से निकलने वाले संकेत को समझ सकता है। सही बॉडी लैंग्वेज सीखना विदेशी भाषा सीखने जैसा है। हमें रोजमर्रा की आदतों में कुछ बुनियादी मुद्राओं पर ध्यान देना चाहिए।

जैसे: हमेशा आई कॉन्टैक्ट रखकर बात करना , थोड़ी – सी मुस्कान का महत्व जानना , हाथ बांधकर बातें करने से बचना , खुली हथेलियां गंभीरता और रेसेप्टिविटी को दर्शाती हैं , हाथ हिलाकर बातचीत करने से समझा जाता है कि आप बड़ी रुचि से बातें कर रहे हैं , जबकि मुंह के ऊपर या चेहरे पर हाथ रखना नेगेटिव बॉडी लैंग्वेज का हिस्सा है । आपके रिलेक्स्ड पॉस्चर का मतलब होगा कि आप कम्युनिकेशन के लिए तैयार हैं । ऑफिस में कभी भी किसी भी स्तर के व्यक्ति से ऊंची आवाज और तेज स्पीड में बात नहीं करनी चाहिए । इससे आप अपने व्यक्तित्व की गंभीरता खो देंगे ।

चाहे आप कार्यालय में अपने सहयोगियों से बात करें या अपनी डेस्क पर काम कर रहे हों, हमेशा अपनी बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दें। कम शब्दों में, हम कह सकते हैं कि बॉडी लैंग्वेज एक ऐसा कौशल है जो हमें अपने मूवमेंट्स , पॉश्चर्स और आवाज के टोन से हासिल करते हैं ।

बॉडी लैंग्वेज पढ़े

कार्यालय में किसी भी व्यक्ति से बात करते समय, शब्दों के अलावा, सामने वाले व्यक्ति की शारीरिक भाषा को भी पढ़ने का प्रयास करना चाहिए। जिसमें सबसे पहले खुद को सामने वाले से रिलेट करना बेहद जरूरी है। इससे आप जान सकेंगे कि वह व्यक्ति भी आप में दिलचस्पी रखता है या नहीं। अगर शुरुआत में व्यक्ति आँख से संपर्क बनाकर बात कर रहा है, लेकिन धीरे-धीरे आँखें बचाना शुरू कर देता है, तो इसका मतलब है कि वह बातचीत में दिलचस्पी खो रहा है।

ऐसे कई संकेत आपको सचेत कर सकते हैं। इसके बाद आपको अपना दृष्टिकोण बदलना चाहिए। अगर आप बॉस के साथ बात कर रहे हैं या कोई सवाल पूछ रहे हैं, तो अक्सर आपको अपने ज्यादातर जवाब सिर्फ बॉडी लैंग्वेज पढ़ने से मिलते हैं। यदि किसी व्यक्ति की जुबान कुछ और कह रही है और शरीर की भाषा कुछ और है, तो उनके शरीर पर विश्वास करें।

अकेले में प्रैक्टिस करें

यदि आप अपनी शारीरिक भाषा से संतुष्ट नहीं हैं, तो घर पर दर्पण के सामने इसे बेहतर बनाने का प्रयास करें। ध्यान रखें कि आपकी बॉडी लैंग्वेज भी वही बोलनी चाहिए जो आप अपने मुंह से बोल रहे हैं। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप क्या कहते हैं , बल्कि यह है कि आप इसे किस तरह कहते हैं ? हमेशा मुस्कराते रहें । जो लोग अपने बारे में अच्छा सोचते हैं उनके पास अक्सर बेहतर बॉडी लैंग्वेज होती है।

कुछ खास बातें

वैसे, बॉडी लैंग्वेज पर शोध सालों से होता आया है। अलग-अलग लोगों ने सकारात्मक शरीर की भाषा के बारे में कई बातें बताई हैं, जो एक लेख में फिट होना मुश्किल है। फिर भी, मोटे तौर पर कुछ बातों को हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि आपकी छवि कार्यालय में एक अच्छे कार्यकर्ता की बन सके। चाहे वह बॉस हो या कलीग , हमेशा आंखों के संपर्क से बात करें, खुली हथेलियां गंभीरता और रेसेप्टिविटी को दर्शाती हैं , करीब रहकर बात करना यानी इंटरेस्ट लेना और दूर होने का मतलब है बातचीत में ध्यान नहीं होना , रिलेक्स्ड पॉस्चर का मतलब होगा कि आप कम्युनिकेशन के लिए तैयार हैं । ऑफिस में हाथ बांधकर खड़ा नहीं होना चाहिए , यह डिफेंसिवनेस और विरोध का संकेत है । हाथ हिलाकर बातचीत करने से समझा जाता है कि आप बड़ी रुचि से बातें

कर रहे हैं । मुंह के ऊपर या चेहरे पर हाथ रखना नकारात्मक शरीर की भाषा का हिस्सा है। कार्यालय में किसी भी स्तर के व्यक्ति से तेज आवाज और तेज गति से बात नहीं करनी चाहिए। इससे आप अपने व्यक्तित्व की गंभीरता खो देंगे।

तो, फिर बॉडी लैंग्वेज को बेहतर बनाने में जुट जाइये। यकीन मानिये , करियर में जितनी महत्वपूर्ण जगह आप अपने काम से बनाएंगे है , उतने ही महत्वपूर्ण आप पॉजिटिव बॉडी लैंग्वेज को अपनाकर भी बन सकेंगे ।

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